बदला।। Real horror कहानी
इस कहानी के लेखिका हैं दीप्ति थाडे करर
और आप देखा रहे हैं अमित लाइव
प्रस्तुत एक और नई कहानी बदला।।
प्रसिद्धि लेखक था उसकी कॉलम से अनेक मनमोहक कहानी का जन्म हुआ था ।।
लेकिन इन दिनों व एक अजीब मुसीबत से जूझ रहा था पिछले कुछ महीनों से उसका दिमाग मानो क्रिएटिविटी से खाली हो गया था ना कोई नई कहानी ना कोई नया विचार कुछ भी उसके मन में नहीं आ रहा था
यह स्थिति उसके लिया बेहद निराशा थी वह दिन रात इसी चिंता में डूब रहता था कि कही उसकी लेखक कलां हमेशा के लिया खत्म ना हो जाएं ईसी चिंता मे एक दिन उसने अपने एक मित्र से अपनी समस्याएं बताई उसके मित्र ने उसे सलाह दी कि शायद माहौल बदलने से कुछ
उसे नया सोच सके मित्र की बात सुनकर चेतन
को अपने बचपन का गांव याद आ गया जहां उसका
जन्म हुआ था और जहां उसने अपने जीवन की
शुरुआती साल बिताए थे चेतन के परिवार में
जब वह छोटा था तभी गाव छोड़कर शहर में
आवास बना लिया था तब से वह कभी गांव नहीं
गया था लेकिन उसके पिताजी ने अपने अंतिम
समय में गांव के घर की चाबिया चेतन को
सौंप दी थी मित्र की सलाह और पिताजी की दी
हुई चाबियां ने चेतन के मन में एक विचार पैदा किया उसने सोचा कि क्यों ना कुछ समय
के लिए वह गांव चला जाए और शांत वातावरण
में रहकर नई कहानी ढूंढने का प्रयास करें
चेतन ने तुरंत गांव जाने का फैसला किया
चेतन करीब शाम के 8 बजे बस से अपने गांव
के बस स्टैंड पर उतरा घर पहुंचने के लिए
उसे और आधे घंटे का रास्ता तय करना था वो अपनी बैग लेकर चल पड़ा थोड़ी दूर आने के बाद सड़क के किनारे एक बूढ़ी औरत रोती हुई
खड़ी थी जिसका चेहरा और शरीर मानो बुरी
तरह से जला हुआ था वह चेतन को मदद के लिए
पुकार प्लीज मेरी मदद करो चेतन उसके पास
जाने के लिए निकला तो वो औरत जोर जोर से
हसने लगी और वहां से गायब हो गई चेतन य
दृश्य देखकर भयभीत हुआ लेकिन उसने सोचा कि
यह उसका वहम होगा और अपने रास्ते चलने लगा
थोड़ी दूर आने पर चेतन को एक औरत अपने दो
बच्चों के साथ दिखाई दी वो उन बच्चों को
वहां से भाग जाने के लिए कह रही थी देखो
वो आ रहा है जल्दी करो भागो यहां से भागो
जल्दी नहीं तो वो तुम्ह जिंदा नहीं
छोड़ेगा चेतन ने सोचा शायद कोई पागल औरत
है उन्हें अनदेखा कर चेतन आगे अपने घर की
ओर चल पडा अब चेतन अपने घर पहुंच चुका था
घर अब पहले जैसा नहीं रहा था बहुत पुराना
हो चुका था मानो जैसे खंडहर हो चेतन ने मन
ही मन सोचा कि अब बहुत काम करना पड़ेगा
सामान रखकर घर के पहले सफाई करनी पड़ेगी
चेतन यह सोच ही रहा था कि उसकी नजर घर के
पास बैठे एक आदमी पर गई वह बहुत परेशान
दिख रहा था चेतन ने उसकी तरफ जाकर देखा तो
उसके शरीर पर कुछ जलने के निशान भी नजर आ
रहे थे चेतन ने उस आदमी से पूछा तुम कौन
हो भाई और यहां क्या कर रहे हो उस आदमी
ने चेतन की ओर देखते हुए कहा मैं बहुत
परेशान हु मालिक मैंने खाना भी नहीं खाया
है अगर आप मेरी कुछ मदद कर दें तो बड़ी
मेहरबानी होगी ऐसा कहकर उसने चेतन के पैर
पकड़ लिए चेतन ने उसे उठाया और कहा अरे
मैं तो इस गांव में अभी-अभी आया हूं मैं
क्या तुम्हारी मदद कर सकता हूं हां मगर
तुम यह घर साफ करने में मेरी मदद कर दो तो
मैं तुम्हें कुछ पैसे जरूर दूंगा उस आदमी
ने थोड़ी देर सोच के कहा मालिक मेरा नाम
भैरू है मेरा कोई घर नहीं है अगर आप मुझे
यहां रहने की इजाजत दे दे तो मैं घर का सारा काम कर दूंगा और आपको कभी कोई शिकायत का मौका नहीं दुगा चेतन को भैरू का यह
सुझाव पसंद आया और चेतन ने भैरू को घर में
रहने की इजाजत दे दी घर की सफाई करते करते
राहत बहुत हो चुकी थी दिन भर की यात्रा और
घर की सफाई करके चेतन बहुत थक गया था चेतन
को नींद तो बहुत आ रही थी लेकिन वह जब भी
सोने का प्रयास करता उसे वो सड़क की
बुढ़िया और वो बच्चों वाली पागल औरत सपने
में दिखाई देते थे सपने में वो चेतन को करीब आते और उससे मदद मांगते थे घबराहट
में चेतन की नींद खुल जाती थी दिन बीतते
जा रहे थे चेतन को कुछ बेचैनी सी हो रही
थी उसे कोई कहानी भी सूझ नहीं रही थी चेतन
बहुत परेशान हो गया था ऐसे ही एक रात चेतन ने शराब की बोतल
खोली और शराब पीने लगा मगर उसे अकेले पीने
में मजा नहीं आ रहा था इसलिए उसने बहरू को
भी अपने साथ शराब पीने के लिए
बुलाया चेतन को देखकर बहरू ने
पूछा मालिक आप कुछ परेशान लग रहे हैं क्या
बात है क्या मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूं
तुम मेरी क्या मदद करोगे भैरू य मैं अपनी
खुद मदद नहीं कर पा रहा हूं फिर भी मालिका
बता कर तो देखिए शायद मैं आपके कुछ काम आ
सकूं भैरू मैं एक लेखक हूं बहुत महीने हुए
मुझे कोई भी अच्छी कहा सूझ नहीं रही इसलिए
मैं यहां आया हूं कि यहां आकर शायद कोई
अच्छी कहानी सूझ जाए मगर यहां भी वही हाल
है मालिक मैं आपको मेरी कहानी सुनाऊं शायद
आपको कुछ मदद मिले तुम्हारी कहानी नहीं
बहरू मुझे ऐसी कोई भी बनाई हुई कहानी नहीं
चाहिए कुछ ओरिजिनल हो तो मजा आ जाए बनाई
हुई नहीं मालिक यह मेरी अपनी कहानी है
तुम्हारी कहानी ऐसी क्या खास बात है
तुम्हारी कहानी में मालिक सुनने के बाद आप
ही फैसला कीजिए खास है कि नहीं तन ने सोचा
चलो कुछ नहीं तो टाइम पास तो हो ही जाएगा
अच्छा ठीक है चलो सुनाओ तुम्हारी कहानी
मालिक मेरी इस कहानी में तीन एकड़ जमीन थी
जमीन में सोने की तरह अनाज उगता था मैंने
खेत के बीचोबीच मेरा घर बनाया था मैं मेरे
5:48 परिवार के साथ अपने घर में हंसी खुशी रहता
था मेरे परिवार में मेरी बूढ़ी मां मेरी
बीवी मैं और मेरे दो बच्चे रहते थे मगर ना
जाने किसकी बुरी नजर लग गई एक साल बारिश
बहुत कम हुई इस कारण फसल भी अच्छी नहीं आई
उस साल बहुत नुकसान हुआ दिन के खर्चे
उठाने में भी दिक्कत होने लगी मैंने साहूकार से कर्जा उठाया यह सोचकर कि कम से
कम अगली फसल तक घर का खर्चा निकल जाए
कर्जा उतारने के लिए साहूकार ने साल भर की
मुद्दत दी छ महीने हंसी खुशी से गुजर गए
मगर सातवें महीने में साहु का घर आ पहुंचा
और मुझसे मेरी जमीन बेचने की बात करने लगा
मैंने साफ मना कर दिया और उनसे कहा कि मैं
साल खत्म होने तक उसके पैसे पूरे चुका
दूंगा मगर साहूकार की नजर मेरी जमीन पर थी
उसने ब्याज बढ़ाकर कर्जे की इतनी कीमत
लगाई कि मेरी अगली दो पीढ़ियां भी कर्जा
उतार नहीं सकती थी एक दिन मेरी बीवी के
आग्रह से मैं साहूकार के घर उससे जवाब
मांगने के लिए चला गया तब साहूकार के
नौकरों ने मुझे बहुत मारा मैं बेहोश हो
गया जब मेरी आंख खुली तब मैं अपने खेत में
पड़ा था मेरे सामने मेरा घर आग से लिपटा
हुआ था और मेरी बीवी बच्चे और मेरी बूढ़ी
मां मुझे अंदर से मदद के लिए पुकार रहे थे
मैं तुरंत उठकर उन्हे बचाने के लिए उनकी
ओर भागा मगर दरवाजे पर ताला लगा हुआ था
मैंने एक बड़े पत्थर से ताला तोड़ दिया और
घर के अंदर उन्हें बचाने के लिए चला गया
बस बहरू बस अब आगे नहीं सुना जाता क्या
इसीलिए तुम्हारे शरीर पर जलने की निशान है
जी हां मालिक चेतन ने अपने शराब का गिलास
खत्म किया और सोने के लिए अंदर अपने कमरे
में चला गया दूसरे दिन चेतन उठा और भैरू
को आवाज देने लगा चेतन की आवाज सुनकर भैरू
बाहर आ गया जी मालिक आपने मुझे बुलाया हां
भैरू मुझे तुम्हारी कहानी सुनकर एक बड़ी
अच्छी कहानी सुजी है तुम्हारा बहुत-बहुत
शुक्रिया अब मैं कहानी लिखने के लिए बैठ
रहा हूं मुझे बिल्कुल भी डिस्टर्ब मत करना
मैं बुलाऊं तभी आना बहरू ने सकारात्मकता
से सिर हिलाया भैरू ने चेतन के खाने पीने
की सब व्यवस्था की और वो वहां से चला गया
चेतन कहानी लिखने में इतना व्यस्त हो गया
था कि उसे ना दिन का पता था और ना रात की
खबर ऐसे ही तीन दिन बीट गए चेतन अभी कहानी
के अंत तक पहुंचा था मगर उसे कहानी का अंत
कैसे करें यह सोच नहीं रहा था बहुत सोचने
के बाद उसने भैरू को आवाज लगाई अब भैरू
मुझे कहानी का अंत सोच नहीं रहा है तुम
बताओ तुमने अपने परिवार को कैसे बचाया और
उसके बाद तुम लोगों ने क्याक किया देख मैं
तो बता रहा था मगर आपने ही मुझे रोक दिया
हां बहरू सॉरी मगर मैं अब सुनना चाहता हूं
कि आगे क्या हुआ मैं बता तो दूंगा मालिक
मगर क्या आप सुन पाओगे हां सुन सकता हूं
अब बहेलिया ना बुझाओ मुझे बता दो आगे क्या
हुआ मैं ताला तोड़कर घर के अंदर चला गया
मुझे देखकर सब लोग मुझसे लिपट गए उन सबको
लेकर मैं बाहर निकल ही रहा था कि घर के
बाहर साहूकार खड़ा दिखाई दिया उसने दरवाजा
बाहर से से बंद कर दिया हम सब अंदर से मदद
के लिए चीखते चिल्लाते रहे मगर उसे हम पर
दया नहीं आई और हम सब आग में जलकर भस्म हो
अगर तुम उस आग में जलकर मर गए हो तुम मेरे
सामने कैसे खड़े हो मालिक सिर्फ मैं ही
नहीं मेरा पूरा परिवार यहां है वो
देखो इतना बोलकर जोर जोर से हसने लगा चेतन
ने नजर घुमाई तो वो सब लोग वही थे जो उसके
सपने में उसे दिखाई दे रहे थे चेतन बहुत
घबरा गया और वह घर से बाहर भागने लगा इतने
में घर की सभी अपने आप बंद हो गए चेतन ने
मदद के लिए खिड़की खोली तो बहरो उस के
परिवार के साथ बाहर खड़ा हुआ हंस रहा था
चेतन रोते हुए डर करर भैरू से बोला भैरू
प्लीज प्लीज मुझे जाने दो मेरी क्या
मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है प्लीज
मुझे जाने
दो
मालिक मैंने जो आपको अपनी कहानी सुनाई
उसके साहूकार आपके दादाजी थे और यह जमीन
जिस पर यह घर बना है वो मेरी है मैं अपनी
जमीन किसी को नहीं
दूंगा इतना कहकर भैरू और उसका परिवार चेतन
को गुस्से से देखने लगा
और देखते ही देखते चेतन का पूरा घर जलने
लगा।।।।।

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